Islamic Story Hindi – मां की दुआ का असर । अजीब घटना

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Islamic Story Hindi मां की दुआ का अजीब घटना

प्रो. डॉ. नूर अहमद साहब लिखते हैं: काफी साल पहले मैं अपनी माँ साहिबा जो राजनपुर में बीमार थीं देखने के लिए जाया करता था, एक दिन शुक्रवार के दिन मैं माँ साहिबा की खिदमत में हाज़िर हुवा, वापसी पर दुआ की दरखास्त की तो बड़ी दुआएं दी.

वापसी पर सिंध पार करने के बाद एक बड़ी नहर जो लगभग 20 फीट गहरी और 30 फीट चौड़ी पानी से लबालब भरी हुई बह रही थी, शुक्रवार की नमाज़ का समय हो चुका था, कार खड़ी कर ड्राइवर तो वुज़ू कर के नमाज़ में शरीक हो गया, मैं ने इस्तिन्जा किया और नहर के किनारे बैठकर वुज़ू कर रहा था कि अचानक नहर का किनारा जो शायद नीचे से पानी ने खोखला कर दिया था पानी में गिरा, और में नहर के अंदर गिर गया, एक दो डुबकियां आईं में नहर के बीच में पहुंच गया, क्योंकि मैं तैरना नहीं जानता था इसलिए डुबकियां आनी शुरू हुईं और सिर चकरा गया, मैंने शोर मचाया मगर सिवा पशु जो नहर के किनारे बैठे थे और कोई था ही नहीं, मेरा डूबजाना यक़ीनी था.

दुआ का असर

मैं ने एक हाथ देखा जिसने मुझे पकड़ा और नहर के बीच से घसीट कर नहर के किनारे पर कर दिया।

अब नहर से निकलना बहुत मुश्किल था, खैर बड़े ज़िक्र ओ अज़कार (मंत्र जाप / दुआएं) किए, कई बार जोर लगाया और आखिर में नहर से निकलने में कामयाब हो गया, कपड़े सारे गीले हो गए कीचड़ लग गई, उसी हालत में नमाज़ की आखरी रकअत मिल गई, सभी मस्जिद वालों ने मेरी हालत देखकर हैरानगी जाहिर की, मुझे यक़ीन है.! मुझे डूबने से बचाने वाली वालिदा मरहूमा की दुआ थी, वरना बचने के कोई ज़ाहिरी असबाब नहीं थे। (माहनामा “मुहासिने इस्लाम” जनवरी 2009)

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